जैन शब्दावली में “पंचप्रवर्तन” से अधिक प्रचलित रूप “पंच परावर्तन” मिलता है। इसका अर्थ है कि जीव संसार में पाँच प्रकार के चक्रों/भ्रमण में भटकता रहता है। “प्रवर्तन” का सामान्य अर्थ प्रचार, प्रवृत्ति या चलना होता है। ( jainworld.com)
Explanation
जैन कोश में Pancha-paraavartana का अर्थ दिया गया है: “mundane soul wanders in five kind of cycle of wandering.” यानी आत्मा कर्मों के कारण बार-बार संसार-चक्र में घूमती रहती है। यह शब्द आत्मा की उस अवस्था को दर्शाता है जब वह मोक्ष-मार्ग से दूर होकर संसार में भ्रमण करती है। ( jainworld.com)
Spiritual Understanding
इसका आध्यात्मिक संदेश यह है कि आत्मा का लक्ष्य इस संसार-भ्रमण से मुक्त होना है। जैन धर्म में इसी कारण संयम, सम्यक् आचरण और शुद्ध साधना पर जोर दिया जाता है। ( jainqq.org)
Takeaway
संक्षेप में, यदि आप “पंचप्रवर्तन” कहकर “पंच परावर्तन” पूछ रहे हैं, तो उसका अर्थ है: आत्मा का पाँच प्रकार के संसार-चक्रों में भटकना। ( jainworld.com)