Pancha-paraavartana का क्या मतलब है
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Answer
पंच-परावर्तन का अर्थ जैन धर्म में जीव के संसार में होने वाले पाँच प्रकार के बार-बार परिवर्तन या भ्रमण से है। इसे द्रव्य, क्षेत्र, काल, भव और भाव—इन पाँच रूपों में समझाया गया है। ( encyclopediaofjainism.com)Explanation
- द्रव्य परिवर्तन: जीव कर्म और नोकर्म पुद्गलों को बार-बार ग्रहण करता और छोड़ता है। ( encyclopediaofjainism.com)
- क्षेत्र परिवर्तन: जीव अलग-अलग स्थानों और जन्म-क्षेत्रों में बार-बार जन्म लेता है। ( encyclopediaofjainism.com)
- काल परिवर्तन: जीव अलग-अलग काल-चक्रों में बार-बार जन्म और मरण करता है। ( encyclopediaofjainism.com)
- भव परिवर्तन: जीव नरक, तिर्यंच, मनुष्य और देव गति के विभिन्न भवों में भ्रमण करता है। ( encyclopediaofjainism.com)
- भाव परिवर्तन: जीव की कषाय, योग, अनुभाग और स्थिति जैसी कर्म-स्थितियाँ बदलती रहती हैं। ( encyclopediaofjainism.com)