Female dikhsha lene ke bad kahan aur kiske sath rhti hai
Answer
दीक्षा लेने के बाद महिला परिवार के साथ नहीं रहती। वह आमतौर पर साध्वी-संघ में रहती है, यानी अन्य साध्वियों के साथ, और अपने गुरु भगवंत / आचार्य / आर्या / साध्वी-प्रमुख के मार्गदर्शन में रहती है।Explanation
जैन परंपरा में दीक्षा के बाद जीवन पूर्ण रूप से संयम, त्याग और साधना का होता है। इसलिए साध्वी:- परिवारिक घर में नहीं रहती
- अपनी साध्वी मंडली के साथ रहती है
- विहार के समय भी साध्वी-संघ के साथ ही चलती है
- रात्रि में सामान्यतः उपाश्रय, धर्मस्थान, या जैन साधुओं-साध्वियों के ठहरने योग्य स्थान में रहती है, जो परंपरा और व्यवस्था के अनुसार होता है
अलग-अलग जैन परंपराओं में कुछ व्यवस्थाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन मूल बात यही है कि वह गृहस्थ जीवन छोड़कर साध्वी जीवन अपनाती है।
Spiritual Understanding
दीक्षा का अर्थ है संसारिक बंधनों से अलग होकर आत्म-साधना में प्रवेश करना। इसलिए साध्वी का जीवन:- अहिंसा
- अपरिग्रह
- संयम
- स्वाध्याय
- तपस्या
के आधार पर चलता है। वह अकेली स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि गुरु-परंपरा और साध्वी-संघ के अनुशासन में रहती है।