Paryay ke bhed
Answer
जैन दर्शन में पर्याय के मुख्य रूप से दो भेद बताए जाते हैं:- द्रव्य-पर्याय
- भाव-पर्याय
Explanation
पर्याय का अर्थ है किसी द्रव्य की अवस्था, परिवर्तन, या रूप-परिवर्तन।1) द्रव्य-पर्याय
- यह द्रव्य की स्थूल या बाह्य अवस्था है।
- समय के साथ जो परिवर्तन दिखाई देता है, वह द्रव्य-पर्याय कहलाता है।
- जैसे:
2) भाव-पर्याय
- यह द्रव्य के गुणों की सूक्ष्म अवस्था है।
- यह आंतरिक परिवर्तन है, जो चेतना या गुणों में होता है।
- जैसे:
Spiritual Understanding
जैन दर्शन में हर द्रव्य ध्रुव भी है और पर्यायशील भी।- ध्रुवता = द्रव्य का स्थायित्व
- पर्याय = द्रव्य का परिवर्तनशील रूप
इससे हमें यह समझ आता है कि:
- संसार में सब कुछ परिवर्तनशील है।
- लेकिन द्रव्य का मूल स्वरूप बना रहता है।
- आत्मा भी अपने शुद्ध स्वरूप में नित्य है, पर उसकी अवस्थाएँ बदलती रहती हैं।