todarmal ji ne diksha kyu nahi liya
Answer
तोडरमल जी के दीक्षा न लेने का कोई एक स्पष्ट, सर्वमान्य और प्रमाणित कारण जैन परंपरा में उपलब्ध नहीं मिलता। वे एक श्रावक के रूप में रहे और उन्होंने शास्त्र-सेवा, अध्ययन, लेखन और धर्मप्रभावना के माध्यम से बहुत बड़ा योगदान दिया।Explanation
जैन धर्म में दीक्षा लेना एक अत्यंत पवित्र और ऊँचा मार्ग है, लेकिन हर महान आत्मा का मार्ग एक जैसा नहीं होता। कुछ आत्माएँ मुनि-दीक्षा लेकर साधना करती हैं, और कुछ गृहस्थ रहते हुए भी:- सम्यक् श्रद्धा निभाती हैं
- व्रतों का पालन करती हैं
- शास्त्रों की सेवा करती हैं
- संघ और धर्म की रक्षा करती हैं
तोडरमल जी को परंपरा में एक विद्वान, धर्मनिष्ठ श्रावक के रूप में स्मरण किया जाता है। इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि उन्होंने गृहस्थ धर्म में रहकर अपना कार्य किया।
Spiritual Understanding
जैन दृष्टि से केवल दीक्षा ही आत्मकल्याण का एकमात्र मार्ग नहीं है। श्रावक धर्म भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। यदि कोई व्यक्ति गृहस्थ रहते हुए भी:- अहिंसा का पालन करे
- संयम रखे
- धर्म-श्रद्धा बनाए रखे
- आत्मिक उन्नति करे
तो वह भी पुण्य और मोक्षमार्ग में आगे बढ़ सकता है।