आराधना करने के करके कोनसे देवलग तक पोहोच सकते है
Answer
जैन धर्म में सच्ची आराधना, व्रत, तप, संयम और सम्यक् श्रद्धा से जीव उच्च देवगति तक जा सकता है। यदि पुण्य बहुत प्रबल हो, तो उसे ऊँचे वैमानिक स्वर्गों में जन्म मिल सकता है, और जैन परम्परा में सर्वार्थसिद्धि को सर्वोच्च देव-लोक जैसा उच्च स्थान माना जाता है।Explanation
लेकिन यह केवल “आराधना” करने से अपने-आप तय नहीं हो जाता। यह बात इन पर निर्भर करती है:- आपकी भावना कैसी है
- सम्यक् दर्शन है या नहीं
- व्रत और नियम कितने शुद्ध हैं
- तपस्या कितनी निष्कपट है
- पुराने कर्म कैसे हैं
इसलिए एक ही उत्तर सब पर लागू नहीं होता। आराधना से पुण्य बढ़ता है, और उससे जीव ऊँची देवगति में जन्म ले सकता है।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में देवलोक में जन्म को अंतिम लक्ष्य नहीं माना गया है। असली लक्ष्य है:- कर्मों से मुक्ति
- सम्यक् ज्ञान
- सम्यक् दर्शन
- सम्यक् चारित्र
- और अंत में मोक्ष
इसलिए आराधना का सर्वोच्च फल केवल स्वर्ग नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि है।