इस मंत्र जाप की सही विधि क्या है
Answer
जैन मंत्र-जाप की सामान्य सही विधि यह है:- शुद्ध और शांत स्थान पर बैठें।
- शरीर को स्थिर और मन को एकाग्र रखें।
- मंत्र का उच्चारण स्पष्ट, श्रद्धापूर्वक और धीरे-धीरे करें।
- जाप माला हो तो उसी का उपयोग करें, नहीं तो मन से गिनती रख सकते हैं।
- जाप के समय अशुद्ध विचार, जल्दबाज़ी और बातचीत से बचें।
- जितना संभव हो, अर्थ और भावना के साथ जाप करें।
- जाप के बाद थोड़ी देर मौन रहकर ध्यान करें।
Explanation
जैन परंपरा में मंत्र-जाप केवल शब्दों का दोहराव नहीं है। उसका उद्देश्य है:- मन की शुद्धि
- आत्म-एकाग्रता
- राग-द्वेष में कमी
- पुण्य और शुभ भाव की वृद्धि
इसलिए सही विधि का सबसे महत्वपूर्ण भाग है भावना। केवल गिनती पूरी करना पर्याप्त नहीं माना जाता; श्रद्धा, शांति और संयम अधिक महत्वपूर्ण हैं।
सामान्यतः जैन मंत्र-जाप के लिए ये बातें ध्यान में रखी जाती हैं:
- शुद्धता: शरीर, वस्त्र और स्थान यथासंभव स्वच्छ हों।
- आसन: शांत, स्थिर और आरामदायक आसन पर बैठें।
- दिशा/स्थिति: परंपरा के अनुसार विनम्र और स्थिर मुद्रा रखें।
- उच्चारण: स्पष्ट, मध्यम स्वर में या मन से जाप करें।
- एकाग्रता: मन को मंत्र पर ही रखें।
- अहिंसक भाव: किसी के प्रति क्रोध, ईर्ष्या या अहंकार न हो।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में मंत्र-जाप का लक्ष्य बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि अंतःकरण की शुद्धि है। जब जाप श्रद्धा, विनय और एकाग्रता से किया जाता है, तब वह आत्मा को शांत करता है और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक बनता है।विशेष रूप से नवकार मंत्र जैसे पवित्र मंत्रों में:
- नम्रता बढ़ती है
- अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु के प्रति श्रद्धा जागती है
- अहंकार घटता है
- आत्मचिंतन विकसित होता है