अनिर्वतिकरण गुण स्थान क्या है
Answer
आप शायद “अनिवृत्तिकरण” कहना चाह रहे हैं। यह 14 गुणस्थानों में अलग से एक गुणस्थान नहीं है, बल्कि 8वें गुणस्थान “अपूर्वकरण” के भीतर आने वाली एक बहुत सूक्ष्म आध्यात्मिक अवस्था है।Explanation
अनिवृत्तिकरण का अर्थ है:- ऐसी अवस्था जिसमें आत्मा की आंतरिक शुद्धि बहुत गहरी हो जाती है
- मन, वचन और काय की प्रवृत्ति में स्थिरता आती है
- कर्मों की स्थिति अत्यंत सूक्ष्म हो जाती है
- अब साधक नीचे की ओर लौटने की प्रवृत्ति से बहुत दूर होता है
यह अवस्था अपूर्वकरण के बाद आती है और साधक को आगे 9वें गुणस्थान “अनिवृत्ति बादर साम्पराय” की ओर ले जाती है।
Spiritual Understanding
जैन दृष्टि से यह अवस्था बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ:- आत्मा की साधना अत्यंत तीव्र और निर्मल होती है
- मोह और कषायों की शक्ति बहुत क्षीण होने लगती है
- मोक्ष-मार्ग की ओर प्रगति और भी दृढ़ हो जाती है
यह बताता है कि साधक अब साधारण स्तर पर नहीं, बल्कि बहुत सूक्ष्म आत्मिक शुद्धि की दिशा में बढ़ रहा है।