ॐ ह्रीं श्रीं नमः मंत्र का उठते बैठते खाते पीते चलते-फिरते कर सकते हैं क्या
Answer
हाँ, मन में स्मरण या जप उठते-बैठते और चलते-फिरते किया जा सकता है। लेकिन खाते-पीते समय या जब मन और शरीर किसी और क्रिया में लगे हों, तब मंत्र का औपचारिक उच्चारण करना उचित नहीं माना जाता।Explanation
जैन परंपरा में मंत्र-जप के लिए:- शुद्धता
- एकाग्रता
- शांत मन
- सम्मानपूर्ण अवस्था
महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इसलिए:
- बैठकर, शांत होकर, और मन लगाकर जप करना सबसे अच्छा है।
- चलते-फिरते मन में स्मरण किया जा सकता है, यदि ध्यान बना रहे।
- खाते-पीते समय मुख अन्य कार्य में होने के कारण जप टालना बेहतर है।
- यदि कोई नित्य-नियमित साधना कर रहे हों, तो उसे उचित विधि से करना चाहिए।