भगवान महावीर का 26वां भव सौधर्म कल्प के देवलोक में माना जाता है। पहले 27वां भव नयासर के रूप में बताया गया है, और उसके बाद आत्मा सौधर्म कल्प में देव के रूप में जन्मी, फिर मरीचि बनी। इसलिए 26वां भव सौधर्म देवलोक से जोड़ा जाता है। ( jainworld.jainworld.com)
Explanation
जैन परंपरा में भगवान महावीर के पूर्वभवों का वर्णन मिलता है। जिस क्रम का उल्लेख मिलता है, उसमें नयासर के बाद सौधर्म कल्प में देवजन्म हुआ, और उसके बाद मरीचि का भव आया। ( jainworld.jainworld.com)
Spiritual Understanding
यह क्रम दिखाता है कि आत्मा धीरे-धीरे पुण्य, सम्यक् दृष्टि और तप के द्वारा आगे बढ़ती है। महावीर प्रभु के पूर्वभवों में भी साधना और धर्म-बीज का विकास स्पष्ट दिखाई देता है। ( jainworld.jainworld.com)