मुनिराज कितने चारित्र का पालन करते है
जैन धर्म के अनुसार मुनिराज (जैन साधु) पाँच महाव्रतों एवं अठारह चारित्रों का पालन करते हैं। लेकिन विशेष रूप से "चारित्र" के संदर्भ में, मुनिराज मुख्य रूप से चार प्रकार के चारित्र का पालन करते हैं, जिन्हें 'चारित्र चतुष्टय' कहा जाता है:
- सामायिक चारित्र — समता भाव में रहना,
- चेदोपस्थापन चारित्र — दोष होने पर प्रायश्चित लेकर पुनः चारित्र का पालन करना,
- परिहारविशुद्धि चारित्र — किसी भी प्रकार के दोष से बचने का पूर्ण प्रयास करना,
- युक्तिकृत्य चारित्र — आवश्यक कार्यों को संयमपूर्वक करना।
इन चार प्रकार के चारित्र का पालन मुनिराज करते हैं, जिससे उनका आचरण शुद्ध एवं संयमित रहता है।