गन्धर भगवान कितने ऋिद्धियों के धारी होते है
जैन धर्म के अनुसार, गणधर भगवान (गन्धर भगवान) आठ (8) प्रकार की ऋिद्धियों के धारी होते हैं। ये आठ ऋिद्धियाँ निम्नलिखित हैं:
- अणिमा (सूक्ष्म होने की शक्ति)
- महिमा (महान/विशाल बनने की शक्ति)
- लघिमा (हल्का होने की शक्ति)
- गर्भितत्व (किसी भी वस्तु में प्रवेश करने की शक्ति)
- प्राप्ति (इच्छित वस्तु को प्राप्त करने की शक्ति)
- प्राकाम्य (इच्छानुसार रूप बदलने की शक्ति)
- ईशित्व (सर्वत्र शासन करने की शक्ति)
- वशित्व (सब पर नियंत्रण करने की शक्ति)
गणधर भगवान तीर्थंकर भगवान के मुख्य शिष्य होते हैं और उन्हें ये आठ ऋिद्धियाँ स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती हैं।