एक मुनि के एक समय में आधिक से अधिक कितने परिषह होते है
जैन धर्म के अनुसार, एक मुनि (जैन साधु) को एक समय में अधिक से अधिक एक ही परिषह होता है।
परिषह का अर्थ है—वे कष्ट या कठिनाइयाँ, जिनका सामना मुनि अपने संयम और साधना के मार्ग में करते हैं। कुल मिलाकर २२ परिषह बताए गए हैं, जैसे—क्षुधा (भूख), पिपासा (प्यास), शीत (ठंड), उष्ण (गर्मी), आदि। लेकिन किसी भी एक समय पर एक ही परिषह अनुभव किया जाता है, जैसे कि यदि भूख लग रही है तो वह 'क्षुधा परिषह' है; यदि प्यास लगी है तो 'पिपासा परिषह' है।
इसलिए, एक समय में अधिकतम एक परिषह ही होता है।