badi sadhu vandana ka line by line meaning
Answer
बड़ी साधु वंदना आचार्य श्री जयमलजी महाराज की 111 पदों वाली भक्ति-रचना है। इसमें 24 तीर्थंकरों, गणधर, साधु-साध्वी और अन्य महान जैन आत्माओं की वंदना की गई है। ( jppjaingroups.com)Explanation
नीचे पहले भाग का सरल, line-by-line अर्थ दिया गया है:- “नमूं अनंत चैबीसी, ऋषभादिक महावीर”
अर्थ: मैं अनंत चौबीसी के सभी तीर्थंकरों को, विशेषकर ऋषभदेव से महावीर स्वामी तक, श्रद्धापूर्वक नमस्कार करता हूँ। ( jainismknowledge.com)
- “इण आर्य क्षेत्र मां, घाली धर्म नी सीर”
अर्थ: इन तीर्थंकरों ने आर्य क्षेत्र में धर्म की श्रेष्ठ स्थापना की। ( jainismknowledge.com)
- “महाअतुल-बली नर, शूर-वीर ने धीर”
अर्थ: वे अपार बल, वीरता और धैर्य वाले महान पुरुष थे। ( jainismknowledge.com)
- “तीरथ प्रवर्तावी, पहुंचा भव-जल-तीर”
अर्थ: उन्होंने तीर्थ और धर्ममार्ग चलाकर जीवों को संसार-सागर से पार लगाने का मार्ग दिखाया। ( jainismknowledge.com)
- “सीमंधर प्रमुख, जघन्य तीर्थंकर बीस”
अर्थ: सीमंधर स्वामी आदि 20 तीर्थंकरों का स्मरण है, जो विदेह क्षेत्र में विराजमान माने जाते हैं। ( jainismknowledge.com)
- “छै अढ़ी द्वीप मां, जयवंता जगदीश”
अर्थ: अढ़ी द्वीप के भीतर ये सभी तीर्थंकर जयवंत और पूज्य हैं। ( jainismknowledge.com)
- “एक सौ ने सत्तर, उत्कृष्ट पदे जगीश”
अर्थ: यहाँ विशेष महान आत्माओं के उत्कृष्ट पद और उनकी महिमा का स्मरण किया गया है। ( jainismknowledge.com)
- “केवली… मुनि… उत्कृष्टा…”
अर्थ: केवलज्ञानी और मुनियों की महान संख्या और उनकी उच्च साधना का स्मरण है। ( jainismknowledge.com)
- “विचरे छै विदेहे, मोटा तपसी घोर”
अर्थ: विदेह क्षेत्र में विचरण करने वाले महान, घोर तपस्वी साधुओं की वंदना है। ( jainismknowledge.com)
- “भावे करि वंदूं, टाले भव नी खोड़”
अर्थ: मैं भावपूर्वक उन महान आत्माओं को वंदन करता हूँ, जिनका स्मरण संसार-बंधन को दूर करता है। ( jainismknowledge.com)