श्री वासुपूज्य जी की यक्षिणी के नाम में परंपरा-भेद मिलता है। कई श्वेतांबर स्रोतों में उन्हें चंडा या गांधारी कहा गया है, जबकि कुछ अन्य स्रोतों में गौरी भी मिलता है। ( jainworld.jainworld.com)
स्पष्टीकरण
इसलिए यदि आप एक ही नाम पूछ रहे हैं, तो चंडा/गांधारी अधिक प्रचलित रूप से बताया जाता है; लेकिन Jain परंपरा में कुछ स्थानों पर गौरी नाम भी मिलता है। ( jainworld.jainworld.com)
Takeaway
जैन परंपरा में यक्ष-यक्षिणी के नामों में कभी-कभी ग्रंथ और परंपरा के अनुसार भेद मिल जाता है। ( jainworld.jainworld.com)