ग्यारहवे गुणस्थान में नौ आस्त्रव होते हैं क्या
Answer
नहीं। ग्यारहवें गुणस्थान में
नौ आस्रव नहीं होते; वहाँ
केवल योग से होने वाला ईर्यापथ आस्रव माना गया है। कषायजन्य
साम्परायिक आस्रव वहाँ नहीं रहता, क्योंकि 11वें से 13वें गुणस्थान तक आस्रव केवल योग से होता है। (
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Explanation
तत्त्वार्थसूत्र की टीका के अनुसार,
कषाय सहित जीवों में साम्परायिक आस्रव होता है, और
कषाय रहित जीवों में ईर्यापथ आस्रव होता है; 11वें गुणस्थान से 13वें गुणस्थान तक यही स्थिति बताई गई है। इसलिए 11वें गुणस्थान को “नौ आस्रव” वाला कहना सही नहीं है। (
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Spiritual Understanding
इससे यह समझ आता है कि 11वां गुणस्थान बहुत ऊँची शुद्ध अवस्था है, जहाँ कषायों का प्रभाव रुक जाता है और केवल अत्यंत सूक्ष्म योग-जन्य प्रवाह रह जाता है। यही कारण है कि वहाँ आस्रव का रूप बहुत सीमित हो जाता है। (
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Takeaway
संक्षेप में:
11वें गुणस्थान में नौ नहीं, केवल ईर्यापथ आस्रव होता है। (
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