Bramhacharya vrat me hastmaithun ka dosh lagta kai kya
13
Answer
हाँ, जैन दृष्टि से हस्तमैथुन ब्रह्मचर्य व्रत की भावना के विरुद्ध माना जाता है। इससे काम-वासना और कषाय बढ़ती हैं, इसलिए इसे दोष की श्रेणी में देखा जाता है।Explanation
जैन धर्म में ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल बाहरी संयम नहीं, बल्कि:- मन की पवित्रता
- इंद्रियों पर नियंत्रण
- काम-भावना का त्याग
- आत्मसंयम
हस्तमैथुन में काम-भावना की तुष्टि और आसक्ति जुड़ जाती है, इसलिए यह ब्रह्मचर्य व्रत के अनुकूल नहीं माना जाता। यदि कोई व्यक्ति ब्रह्मचर्य का पालन कर रहा है, तो यह उसके संकल्प में बाधा डालता है।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में लक्ष्य है:- कषायों को कम करना
- इंद्रियों पर विजय पाना
- आत्मा की शुद्धि करना
काम-विकार आत्मिक उन्नति में बाधक माना जाता है। इसलिए ब्रह्मचर्य को बहुत उच्च साधना माना गया है।