पाँचवी ढाल में किसकी चर्चा की गई है?
पाँचवी ढाल जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथ "समयसार" (Acharya Kundkund द्वारा रचित) की एक महत्वपूर्ण ढाल (भाग) है। पाँचवी ढाल में "परिणामस्वरूप जीव का ज्ञान" (परिणाम का विवेचन) और उसमें आत्मा के शुद्ध और अशुद्ध परिणामों की चर्चा की गई है। इसमें बताया गया है कि जीव अपने परिणामों (भावों) के अनुसार बंधन या मोक्ष को प्राप्त करता है।
इस ढाल के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि आत्मा के शुद्ध भाव ही मोक्ष का कारण हैं और अशुद्ध भाव संसार में बंधन का कारण बनते हैं। संक्षेप में, पाँचवी ढाल में आत्मा के परिणाम, उनकी शुद्धता-अशुद्धता और उनके फलों की चर्चा की गई है।