24. आत्मज्ञान न होने से जीव को मुनि बनकर कहाँ उत्पन्न होने पर भी सुख प्राप्त नहीं हुआ? (3)
२४. आत्मज्ञान न होने से जीव को मुनि बनकर स्वर्ग, भूमि अथवा नर्क—तीनों स्थानों में उत्पन्न होने पर भी उसे परम सुख की प्राप्ति नहीं होती। जब तक आत्मा को स्व-रूप का ज्ञान नहीं होता, तब तक वह कहीं भी (चाहे वह मुनि रूप में भी जन्म ले) सच्चे सुख का अनुभव नहीं कर सकता।
संक्षिप्त उत्तर: आत्मज्ञान न होने से जीव को मुनि बनकर स्वर्ग, पृथ्वी या नर्क—कहीं भी उत्पन्न होने पर भी परम सुख प्राप्त नहीं होता।