सम्यक दर्शन क्या है
सम्यक दर्शन जैन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है। "सम्यक" का अर्थ है "सही" या "उचित" और "दर्शन" का अर्थ है "दृष्टि" या "विश्वास"। अतः सम्यक दर्शन का अर्थ है—सही या यथार्थ दृष्टिकोण, अर्थात् आत्मा, परमात्मा (अरिहंत), सिद्ध, धर्म, आदि के प्रति यथार्थ, निर्दोष और श्रद्धायुक्त दृष्टि रखना।
जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए तीन रत्नों (त्रिरत्न) की आवश्यकता बताई गई है:
- सम्यक दर्शन (Right Faith)
- सम्यक ज्ञान (Right Knowledge)
- सम्यक चारित्र (Right Conduct)
सम्यक दर्शन के लक्षण:
- तत्त्वों (जीव, अजीव आदि) में श्रद्धा रखना
- अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु (पंच परमेष्ठी) में आस्था
- मिथ्यात्व (गलत विश्वास) का त्याग
- राग-द्वेष से ऊपर उठकर तत्त्वों की यथार्थता को देखना
सम्यक दर्शन के बिना मोक्ष मार्ग पर चलना असंभव है। पहले सम्यक दर्शन, फिर सम्यक ज्ञान और फिर सम्यक चारित्र का पालन आवश्यक है।
संक्षेप में: सम्यक दर्शन वह अवस्था है जिसमें कोई व्यक्ति तत्त्वों के प्रति सही श्रद्धा और विश्वास रखता है, जिससे वह मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होता है।