Indra ko nighod ka Swaroop kidney Kaha
आपका प्रश्न "इन्द्र को निगोध का स्वरूप किडनी कहा" — Jainism (जैन दर्शन) के अनुसार, 'निगोध' एक विशेष प्रकार का जीवन रूप (life form) है, जो अत्यंत सूक्ष्म और स्थावर जीवों की कोटि में आता है। निगोध को 'सम्पूर्ण सुख-दुःख से रहित, अत्यंत अल्प आयु और अल्प विकल्प वाले जीव' के रूप में वर्णित किया जाता है। निगोध मुख्यतः वनस्पति जीवों के समान होते हैं, जिनमें कोई विशेष इन्द्रिय नहीं होती।
इन्द्रियाँ (इन्द्रिय) जैन दर्शन में पाँच प्रकार की मानी गई हैं: स्पर्श, रसना, घ्राण, चक्षु और श्रवण। निगोध जीव प्रायः एकेन्द्रिय (एक इन्द्रिय वाले) होते हैं, और वे स्पर्शेन्द्रिय के अलावा किसी अन्य इन्द्रिय का अनुभव नहीं कर सकते। किडनी (गुर्दा) शारीरिक अंग है, जिसका जैन दर्शन की जीवों की इन्द्रियों अथवा निगोध की प्रकृति से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं कहा गया है।
संक्षेप में:
- जैन दर्शन में निगोध एक अत्यंत सूक्ष्म, एकेन्द्रिय जीव हैं।
- इनमें केवल स्पर्शेन्द्रिय होती है, अन्य कोई इन्द्रिय नहीं।
- किडनी (इन्द्रिय या अंग) के रूप में निगोध का उल्लेख जैन साहित्य में नहीं है।
यदि आपको निगोध या इन्द्रियों के विषय में और अधिक जानकारी चाहिए, तो कृपया स्पष्ट करें।