यदि आपका आशय राजा सम्प्रति से है, तो वे आचार्य सुहस्तिगिरि / सुहस्तिसूरि से प्रभावित हुए थे। ( jainqq.org)
Explanation
जैन परंपरा के अनुसार, राजकुमार अवस्था में सम्प्रति ने आचार्य सुहस्तिगिरि के नेतृत्व में एक भव्य जैन शोभायात्रा देखी। उसी समय उन्हें लगा कि वे आचार्य को पहले भी जानते हैं, और आगे चलकर वे उन्हें अपने पूर्वजन्म के गुरु के रूप में पहचानते हैं। इसके बाद सम्प्रति ने जैन धर्म को अपनाया और उन्हें अपना गुरु माना। ( jainqq.org)
Spiritual Understanding
यह कथा जैन धर्म में गुरु-भक्ति, पूर्वजन्म के संस्कार, और सदुपदेश की शक्ति को दर्शाती है। एक सच्चे आचार्य का संपर्क जीवन की दिशा बदल सकता है। ( jainqq.org)
Takeaway
संक्षेप में: राजा सम्प्रति आचार्य सुहस्तिसूरि से प्रभावित हुए थे। ( jainqq.org)