Bhagwan ke nishan kaise aaye
Answer
जैन परंपरा में “भगवान के निशान” से सामान्यतः तीर्थंकरों के लांछन का अर्थ लिया जाता है। ये भगवान के शरीर पर बने निशान नहीं, बल्कि उनकी पहचान के प्रतीक होते हैं।Explanation
24 तीर्थंकरों के लिए 24 अलग-अलग लांछन माने गए हैं, जैसे:- ऋषभदेव — बैल
- पार्श्वनाथ — सर्प
- महावीर स्वामी — सिंह
ये लांछन जैन मूर्तियों, प्रतिमाओं और पूजा-विधि में तीर्थंकर की पहचान के लिए उपयोग किए जाते हैं। परंपरा के अनुसार, ये प्रतीक जैन आगम और शिल्प परंपरा में स्थापित हुए, ताकि हर तीर्थंकर को अलग-अलग पहचाना जा सके।
Spiritual Understanding
इन निशानों का आध्यात्मिक अर्थ यह है कि:- हर तीर्थंकर की विशेष पहचान है
- ये हमें भक्ति और स्मरण में सहायता करते हैं
- प्रतीक हमें याद दिलाते हैं कि परमात्मा का स्वरूप शरीर नहीं, आत्मा की पूर्ण शुद्धता है