नवकासी करने से कितने वर्षका नरक आयुष्य कम होता है
जैन धर्म के अनुसार, "नवकासी" (नवकारसी) एक व्रत है जिसमें sunrise के बाद 48 मिनट तक कोई भी भोजन या जल ग्रहण नहीं किया जाता। नवकारसी व्रत का मुख्य उद्देश्य संयम और आत्मशुद्धि है।
जहाँ तक नरक आयुष्य (नरक में जाने का कारण या वहाँ बिताए जाने वाले समय) की बात है, शास्त्रों में ऐसा कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि नवकारसी करने से नरक आयुष्य में कितने वर्ष की कमी आती है। जैन आगमों और तत्त्वार्थ सूत्र आदि ग्रंथों में नवकारसी के पुण्य फल का उल्लेख है, जिससे सम्यक् दृष्टि, संयम, और मोक्ष मार्ग में सहायता मिलती है। नवकारसी जैसे व्रत से पाप कर्मों का बंधन कम होता है और नरक, तिर्यंच या नारकीय गति में जन्म लेने की संभावना घटती है।
लेकिन किसी विशेष संख्या—जैसे कि कितने वर्ष नरक आयुष्य कम होता है—का उल्लेख जैन शास्त्रों में नहीं मिलता। यह व्रत पुण्यवर्धक है और जीव के भव-भव के सुधार में सहायक है।
सारांश: नवकारसी करने से नरक आयुष्य कितने वर्ष कम होता है, इसका कोई निश्चित संख्या या वर्ष शास्त्रों में नहीं बताया गया है। हाँ, यह व्रत नरक गति से बचने और पुण्य वृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।