निसीह का क्या मतलब है
Answer
जैन परंपरा में “निसीह” का अर्थ आमतौर पर त्याग, निषेध, या बाहर छोड़ देना होता है। यह प्राकृत शब्द “निसीहि / निस्सीहि” से जुड़ा है, जिसका भाव है: मैं सांसारिक बातों को छोड़ रहा हूँ।Explanation
जैन मंदिर में प्रवेश करते समय “निसीह” बोलने की परंपरा का भाव यह होता है कि:- मन से बाहरी काम-धंधे छोड़ दिए जाएँ
- भीतर शुद्ध भाव से प्रवेश किया जाए
- अहंकार, बातचीत, और सांसारिक विचारों को बाहर रखा जाए
इसलिए “निसीह” सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि वैराग्य और एकाग्रता का संकेत है।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में मंदिर या पूजन-स्थान में प्रवेश करते समय मन को शुद्ध करना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। “निसीह” का भाव हमें सिखाता है:- भीतर जाते समय मन को शांत रखें
- बाहरी उलझनों को छोड़ें
- भगवान और आत्म-चिंतन की ओर ध्यान लगाएँ
यह शब्द संयम, विनय, और अंतर्मुखता का स्मरण कराता है।