Gusta mein Char Mohini ki kitni Pragati Yon ka Shyam Hota Hai
उत्तर
यदि आपका प्रश्न गुणस्थान में मोहनीय कर्म के बारे में है, तो सामान्यतः मोहनीय कर्म की 28 प्रकृतियाँ मानी जाती हैं। इनमें से क्षय, उपशम, और क्षयोपशम गुणस्थानों के अनुसार अलग-अलग होता है।स्पष्टीकरण
जैन कर्म-सिद्धांत में मोहनीय कर्म बहुत महत्वपूर्ण है। इसके अंतर्गत:- दर्शनमोहनीय की 3 प्रकृतियाँ
- चारित्रमोहनीय की 25 प्रकृतियाँ
कुल मिलाकर 28 प्रकृतियाँ होती हैं।
गुणस्थान के अनुसार इनमें से कुछ प्रकृतियाँ:
- क्षय होती हैं
- उपशम होती हैं
- या क्षयोपशम रूप में रहती हैं