क्या पाँचवे देवलोक के सम्यक्तवी और लोकान्तिक देव अपने पूर्व भव के मनुष्य परिवार को धर्म करने की प्रेरणा आभास के रूप में करा सकते हैं क्या
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Answer
हाँ, जैन दृष्टि से ऐसा संभव माना जाता है, लेकिन सीधे आदेश या बाध्य करने के रूप में नहीं, बल्कि सूक्ष्म प्रेरणा, स्वप्न, शुभ आभास, या मानसिक संकेत के रूप में।Explanation
- देव अपने पूर्व संबंधों के कारण कभी-कभी अपने पुराने परिवार के प्रति शुभ भावना रख सकते हैं।
- यदि उस परिवार में पुण्य, पात्रता और ग्रहणशीलता हो, तो उन्हें:
- लेकिन जैन सिद्धांत के अनुसार कोई भी देव किसी जीव के कर्म को जबरदस्ती नहीं बदल सकता।
- वास्तविक धर्म-प्रेरणा का मूल कारण जीव का अपना पुण्य, भाव और कर्म-परिपाक होता है।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में देवों की शक्ति सीमित होती है। वे सहायक निमित्त बन सकते हैं, पर मुख्य कारण जीव का अपना अंतरंग भाव है। इसलिए यदि किसी को धर्म की प्रेरणा मिलती है, तो उसे:- अपने पुण्य का फल,
- सत्-परिणाम,
- और शुभ निमित्त