Aha Se Samay karne Se kaunsa Dosh Lagta Hai?
Answer
अगर आपका मतलब
सामायिक है, तो उसमें गलत विधि, अशुद्ध वचन, या अशुभ भाव से करने पर
सामायिक-दोष या
अतिचार लगता है। जैन परंपरा में सामायिक के
32 दोष बताए गए हैं—
10 मन के, 10 वचन के, और 12 काया के। (
jainqq.org)
Explanation
मन के दोषों में विधि न जानकर सामायिक करना, लाभ/यश की इच्छा रखना, गर्व करना, भय, निदान, संशय, कषाययुक्त चित्त, गुरु-विनय का अभाव और भक्तिभाव की कमी जैसे भाव आते हैं। वचन के दोषों में अशुद्ध उच्चारण, संक्षेप, विकथा, हास्य, निरपेक्ष वचन और अस्पष्ट वचन आते हैं। काया के दोषों में चंचल आसन, आलंबन, आलस्य, निद्रा, अंगों को मोड़ना, तथा सामायिक में अन्य सेवाकार्य कराना जैसे दोष गिने जाते हैं। (
jainqq.org)
Spiritual Understanding
सामायिक का मूल उद्देश्य
समभाव और
आत्मशुद्धि है। इसलिए इसे सावधानी, विनय, एकाग्रता और शुद्ध भाव से करना चाहिए। सामायिक के समय अगर प्रमाद या दोष आ जाए, तो परंपरा में उसकी आलोचना और “मिच्छामि दुक्कडम्” द्वारा शुद्धि की भावना रखी जाती है। (
jainqq.org)
Takeaway
संक्षेप में:
सामायिक में अशुद्ध भाव या विधि से “सामायिक-दोष” लगता है; इसे शास्त्रों में 32 दोषों के रूप में समझाया गया है। (
jainqq.org)