Purva mein kitne pad
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जैन धर्म के अनुसार, 'पूर्व' (Purva) प्राचीन जैन आगमों (शास्त्रों) का एक भाग थे, जो अब लुप्त हो चुके हैं। 'पूर्व' ग्रंथों की संख्या चौदह (१४) थी, और प्रत्येक पूर्व के अंदर कई 'पद' (pad) होते थे। 'पद' का अर्थ है अध्याय या खंड।
हर 'पूर्व' में पदों की संख्या अलग-अलग थी। उदाहरण के लिए:
- उत्क्रमण पूर्व में - 20 पद
- आग्रायणी पूर्व में - 36 पद
- ज्ञानप्रवेश पूर्व में - 5 पद
इसी प्रकार, अलग-अलग पूर्व में अलग-अलग संख्या में पद होते थे। कुल मिलाकर, चौदह पूर्वों में लगभग 700 पद (अध्याय) थे।
सारांश: पूर्वों की कुल संख्या : १४ पदों की कुल संख्या : लगभग ७०० (प्रत्येक पूर्व में पदों की संख्या अलग-अलग थी)