अहंभाव से सामायक करने से कौन सा दोष लगता है
Answer
अहंभाव से सामायिक करने पर मुख्य रूप से मान-कषाय यानी अहंकार का दोष लगता है।Explanation
सामायिक का मूल भाव है:- समता
- नम्रता
- आत्म-शुद्धि
- राग-द्वेष का क्षय
जब सामायिक में “मैं अच्छा हूँ”, “मैं श्रेष्ठ हूँ”, “मैंने अधिक किया” जैसा भाव आ जाता है, तब उसकी पवित्रता कम हो जाती है। ऐसे में बाहरी क्रिया तो होती है, लेकिन भीतर अहंकार और मान-कषाय बना रहता है।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में सामायिक का फल तब अधिक होता है जब वह निर्मल भाव से की जाए। अहंभाव:- समता को तोड़ता है
- आत्म-शांति को कम करता है
- पुण्य-फल को घटाता है
- साधना को अहंकार की ओर मोड़ देता है
इसलिए सामायिक करते समय विनय, सरलता और समभाव रखना बहुत आवश्यक है।