शास्त्र में शालिवृक्ष से उपमित कौन से आचार्य हुए
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उत्तर
शास्त्र में किसी एक विशेष नाम वाले आचार्य को नहीं, बल्कि “सुन्दर आचार्य” को शालवृक्ष की उपमा दी गई है। स्थानांगसूत्र के उद्धरण में कहा गया है कि जैसे शाल-वृक्षों के बीच महान शाल-वृक्ष शोभित होता है, वैसे ही सुन्दर आचार्य शोभित होते हैं। उसी प्रसंग में असुन्दर आचार्य की तुलना एरण्ड-वृक्ष से की गई है। ( jainworld.jainworld.com)Explanation
यह उपमा यह बताती है कि:- जैसे वन में श्रेष्ठ वृक्ष अपनी शोभा से अलग दिखाई देता है,
- वैसे ही गुणवान, संयमी और सुशोभित आचार्य संघ में विशेष आदर के पात्र होते हैं।
Spiritual Understanding
जैन दृष्टि में आचार्य की शोभा बाहरी नहीं, बल्कि:- ज्ञान,
- संयम,
- विनय,
- और चारित्र