श्रावक का ६,७,८ व्रत क्या कहलाता है
Answer
श्रावक के ६वें, ७वें और ८वें व्रत क्रमशः ये कहलाते हैं:- ६वाँ व्रत: दिग्परिमाण व्रत
- ७वाँ व्रत: उपभोग-परिभोग परिमाण व्रत
- ८वाँ व्रत: अनर्थदण्ड विरमण व्रत
Explanation
- दिग्परिमाण व्रत: जीवन की गतिविधियों और यात्रा की एक निश्चित सीमा तय करना।
- उपभोग-परिभोग परिमाण व्रत: उपयोग की जाने वाली और बार-बार उपयोग में आने वाली वस्तुओं की मर्यादा रखना।
- अनर्थदण्ड विरमण व्रत: व्यर्थ, पापकारी और दूसरों को हानि पहुँचाने वाले कार्यों से बचना।
Spiritual Understanding
ये तीनों व्रत श्रावक के जीवन में संयम, मर्यादा और अहिंसा को मजबूत करते हैं। इनसे इच्छाएँ नियंत्रित होती हैं, पाप कर्मों से बचाव होता है, और आत्मिक उन्नति में सहायता मिलती है।Takeaway
संक्षेप में:- 6वाँ = दिग्परिमाण
- 7वाँ = उपभोग-परिभोग परिमाण
- 8वाँ = अनर्थदण्ड विरमण
अगर चाहें, मैं श्रावक के 12 व्रतों की पूरी सूची भी क्रम से बता सकता हूँ।