समुदघात कितने हैं
Answer
जैन धर्म में सामान्यतः
समुद्घात सात माने गए हैं:
वेदना, कषाय, विक्रिया, मरणान्तिक, तैजस, आहार, और कैवली। (
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Explanation
अर्थात आत्मा के प्रदेशों के विशेष प्रसार की यह सात प्रकार की अवस्थाएँ मानी जाती हैं। कुछ ग्रंथों और परंपराओं में नामों का उच्चारण थोड़ा भिन्न मिल सकता है, लेकिन संख्या
सात ही बताई गई है। (
jainqq.org)
Spiritual Understanding
समुद्घात का विषय जैन दर्शन में आत्मा, कर्म और शरीर के संबंध को समझने में महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि जीव विशेष परिस्थितियों में अपने प्रदेशों का विस्तार कर सकता है। (
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Takeaway
संक्षेप में: समुद्घात सात हैं।