मेरा प्रशन है कि यदि कोई व्यक्ति शमशान में जाकर ऐसा बोलता है कि हे व्यंतर देवों जिन मंदिर तोड़ दो तो व्यंतर सुन सकता है या नहीं भले ही उस व्यक्ति को वो दिख नही रहा लेकिन सुन सकता है या नहीं
Answer
जैन दृष्टि से व्यंतर देव अदृश्य होते हैं, लेकिन “अदृश्य” होने का अर्थ “सुन नहीं सकते” नहीं होता। यदि वे उस स्थान पर उपस्थित हों, तो सुन सकते हैं। लेकिन यह कहना ठीक नहीं होगा कि वे हर समय और हर जगह सब कुछ सुन ही लेते हैं। उनकी सुनने की शक्ति उनके स्वरूप, स्थिति और उस समय उनकी उपस्थिति पर निर्भर करती है।Explanation
- व्यंतर देव जैन परंपरा में एक प्रकार के देव/देवयोनि जीव माने जाते हैं।
- वे मनुष्यों की तरह दिखाई नहीं देते, इसलिए सामान्य आँखों से नहीं दिखते।
- लेकिन जैन मान्यता के अनुसार, सूक्ष्म जीवों और देवों की सत्ता केवल देखने से नहीं आँकी जाती।
- इसलिए यदि कोई व्यक्ति श्मशान में जाकर ऐसा कहे कि “हे व्यंतर देवों, जिनमंदिर तोड़ दो,” तो संभव है कि वहाँ उपस्थित व्यंतर सुन लें।
- फिर भी यह आवश्यक नहीं कि हर व्यंतर वह बात सुने ही। यह उनकी उपस्थिति और ध्यान पर निर्भर करेगा।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में जिनमंदिर, जिनप्रतिमा और तीर्थंकरों के प्रति अपमानजनक वचन कहना अशुभ माना जाता है। ऐसी बातों का प्रभाव सिर्फ “देव सुनेंगे या नहीं” तक सीमित नहीं है, बल्कि बोलने वाले के अपने कर्मों पर भी पड़ता है।इसलिए:
- अपमानजनक वचन नहीं बोलने चाहिए
- भय, द्वेष या उकसावे की भाषा से बचना चाहिए
- जिनधर्म में श्रद्धा और मर्यादा रखनी चाहिए