भले ही व्यंतर ने सुन लिया हो लेकिन इसका मतलब यह थोड़ी कि वो मंदिर तोड़ देगा
Answer
हाँ, बिल्कुल। केवल यह कि व्यंतर ने सुन लिया, इसका अर्थ यह नहीं कि वह तुरंत मंदिर तोड़ ही देगा।Explanation
जैन दृष्टि से सुनना और करना दो अलग बातें हैं। कोई भी व्यंतर देव हो, तो भी उसके:- भाव
- कर्म
- क्रोध या अहंकार
- शक्ति और परिस्थिति
इन सबके अनुसार ही कार्य होता है।
इसलिए:
- अगर उसने बात सुन ली,
- तो यह सिर्फ इतना दर्शाता है कि उसे जानकारी मिली,
- लेकिन उसका तुरंत उसी पर चल देना निश्चित नहीं है।
कई बार शास्त्रीय कथाओं में कोई देव या व्यंतर क्रोधित होकर हानि करने की इच्छा करता है, लेकिन वह हर बार सफल हो, यह जरूरी नहीं। धर्म, भक्ति, संयम, और पुण्य का प्रभाव भी होता है।
Spiritual Understanding
जैन धर्म में यह समझ बहुत महत्वपूर्ण है कि:- मन की सुनवाई और कर्म का निष्पादन एक जैसे नहीं होते।
- किसी प्राणी में सुनकर भी विवेक हो सकता है।
- और यदि मोह-क्रोध प्रबल हो, तभी वह गलत कार्य की ओर बढ़ता है।
इसलिए केवल भय के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।