Vigyan yah kahta Hai ki manushya 40 lakh sal pahle hue The aur homo habils se homo sapiens Inka Vikas hua aur unki buddhi Mein bhi badlav aaya to Aisa vigyan isliye kahta Hai kyunki usko Jo karodon sal purani jivo ki Jo avshesh mile Hain vah 15 se 16 karo
Answer
जैन दर्शन के अनुसार जीव अनादि-अनंत है, शरीर नश्वर है। इसलिए विज्ञान की “मनुष्य 40 लाख साल पहले हुए” वाली बात और जैन दृष्टि एक ही विषय को अलग तरीके से देखती हैं। जैन मत में आत्मा का अस्तित्व हड्डियों या fossils पर निर्भर नहीं है।Explanation
विज्ञान मुख्य रूप से भौतिक प्रमाण जैसे हड्डियाँ, परतें, और अवशेष देखकर निष्कर्ष निकालता है। जैन दर्शन जीव, कर्म और आत्मा के आधार पर जीवन को समझाता है।इसलिए:
- प्राचीन जीवों के अवशेष मिलना जरूरी है, लेकिन हर जीव की हड्डियाँ बचें, यह जरूरी नहीं।
- मानव शरीर और जीव-जगत का इतिहास केवल fossils से पूरा नहीं समझा जा सकता।
- जैन दृष्टि में जीव अलग-अलग योनियों में कर्मों के अनुसार जन्म लेते हैं।
- मनुष्य-योनि भी एक विशेष कर्म-स्थिति के कारण मिलती है, न कि केवल जैविक बदलाव से।
इसलिए यदि किसी बहुत पुराने भू-स्तर में मानव हड्डियाँ नहीं मिलीं, तो जैन दर्शन के अनुसार यह कोई विरोध नहीं है। क्योंकि जीव का होना और हड्डियों का मिलना, दोनों अलग बातें हैं।
Spiritual Understanding
जैन धर्म का मूल संदेश है:- मैं शरीर नहीं हूँ, आत्मा हूँ
- शरीर बदलता है, आत्मा नहीं
- जीव का बंधन और मोक्ष कर्मों पर निर्भर है
इसीलिए जैन दर्शन का लक्ष्य केवल यह जानना नहीं कि मनुष्य कब आया, बल्कि यह समझना है कि जीव कर्म से कैसे बंधता है और कैसे मुक्त होता है।