उपाध्याय यशोविजयजी म.सा. द्वारा रचित अष्टक ?
उत्तर
उपाध्याय श्री यशोविजयजी महाराज का प्रसिद्ध अष्टक-ग्रंथ
“ज्ञानसार” है। इसमें
32 अष्टक हैं। (
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व्याख्या
इन 32 अष्टकों में आत्म-शोधन, समत्व, ज्ञान, शम, इंद्रिय-जय, त्याग, ध्यान और तप जैसे विषयों का सुंदर विवेचन किया गया है। इनमें
पूर्णाष्टक, लग्नता, स्थिरता, मोहत्याग, ज्ञान, शम, इंद्रियजय, त्याग आदि अष्टक शामिल हैं। (
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आध्यात्मिक अर्थ
“ज्ञानसार” केवल साहित्य नहीं, बल्कि साधना का मार्गदर्शन है। यह आत्मा को भीतर से शुद्ध करने और मोक्षमार्ग पर स्थिर करने की प्रेरणा देता है। (
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सार
यदि आप “उपाध्याय यशोविजयजी द्वारा रचित अष्टक” पूछ रहे हैं, तो उसका सबसे प्रसिद्ध उत्तर
ज्ञानसार अष्टक है। (
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