Virus jiv hai ya pudgal
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Answer
जैन दृष्टि से वायरस को सामान्यतः पुद्गल माना जाता है, जीव नहीं।Explanation
जैन धर्म में जीव वह है जिसमें चेतना होती है। वायरस में स्वतंत्र चेतना, इंद्रिय-क्रिया, और आत्मा का स्पष्ट लक्षण नहीं माना जाता, इसलिए उसे जीव नहीं कहा जाता। वह सूक्ष्म भौतिक तत्व यानी पुद्गल की श्रेणी में समझा जाता है।Spiritual Understanding
जैन दर्शन में जीव और अजीव का भेद बहुत महत्वपूर्ण है।- जीव = चेतन सत्ता
- पुद्गल = जड़, भौतिक पदार्थ
इस आधार पर वायरस को पुद्गल समझना अधिक उपयुक्त है। हालाँकि, आधुनिक विज्ञान में वायरस को जीवन और निर्जीव के बीच की स्थिति में देखा जाता है, लेकिन जैन दृष्टि से उसे जीव नहीं माना जाता।