Irshana karne Shri Bhavna ki karo
Answer
यदि आपका अर्थ ईर्ष्या से है, तो Jain Dharma में इसे शांत करने के लिए यह भावना करें:“जिसमें गुण हैं, उसकी मैं अनुमोदना करता हूँ। जिसे मिला है, वह उसका पुण्य है। मैं किसी से द्वेष नहीं रखूँगा। सब जीव सुखी हों, और मेरा मन निर्मल रहे।”
Explanation
Jain दृष्टि में ईर्ष्या मन को अशांत करती है। इसके स्थान पर हम:- अनुमोदना करते हैं
- समता रखते हैं
- द्वेष छोड़ते हैं
- अपने भीतर गुण बढ़ाने का प्रयास करते हैं