जैन परंपरा में महाराष्ट्र का “शत्रुंजय” आम तौर पर कुम्भोजगिरी तीर्थ को कहा जाता है, जहाँ श्री जगवल्लभ पार्श्वनाथ का मंदिर है। श्वेताम्बर समुदाय इसे “दक्षिण महाराष्ट्र का शत्रुंजय” मानता है। ( jainsite.com)
Explanation
यह तीर्थ कोल्हापुर ज़िले में है और जैन भक्तों के लिए बहुत पवित्र माना जाता है। इसलिए इसकी महिमा और तीर्थ-गौरव के कारण इसकी तुलना शत्रुंजय से की जाती है। ( jainsite.com)
Spiritual Understanding
जैन धर्म में ऐसे तीर्थ स्थान श्रद्धा, तप और आत्मकल्याण की प्रेरणा देते हैं। कुम्भोजगिरी की पावनता उसे विशेष महत्व देती है, इसलिए भक्त इसे बड़े सम्मान से याद करते हैं। ( jainsite.com)
Takeaway
संक्षेप में: कुम्भोजगिरी तीर्थ — जहाँ श्री जगवल्लभ पार्श्वनाथ विराजमान हैं — को “दक्षिण महाराष्ट्र का शत्रुंजय” कहा जाता है। ( jainsite.com)