Naam karm ke naam
Answer
नामकर्म वह कर्म है जो जीव को शरीर, रूप, रंग, गति, जाति, स्वर, संघटना आदि विशेषताएँ देता है। इसके प्रमुख नाम/प्रकृतियाँ ये मानी जाती हैं:- गति-नाम
- जाति-नाम
- शरीर-नाम
- अंगोपांग-नाम
- बंधन-नाम
- संघात-नाम
- संस्थान-नाम
- संहनन-नाम
- वर्ण-नाम
- गंध-नाम
- रस-नाम
- स्पर्श-नाम
- आनुपूर्व्य-नाम
- अगुरुलघु-नाम
- उपघात-नाम
- पराघात-नाम
- उच्छ्वास-नाम
- विहायोगति-नाम
- त्रस-नाम
- स्थावर-नाम
- सुभग-नाम
- दुर्भग-नाम
- सुस्वर-नाम
- दुःस्वर-नाम
- आदेय-यशस्कर-नाम
- अयशस्कर-नाम
- निर्माण-नाम
- तीर्थंकर-नाम
Explanation
जैन दर्शन में नामकर्म के द्वारा जीव को शरीर और जीवन-रचना से जुड़ी विशेषताएँ प्राप्त होती हैं। इसी कर्म के कारण किसी जीव की:- गति
- देह-रचना
- रंग-रूप
- आवाज
- आकर्षण
- संघटना
- और अन्य शारीरिक विशेषताएँ
निर्धारित होती हैं।