देवगिरी पर जिनालय पृथ्वीधर (Prithvidhara) ने बनवाया था। वे मालवा के राजा जयसिंह के मंत्री थे और जैन परंपरा के अनुसार श्वेताम्बर मार्ग के समर्थक थे। ( jainqq.org)
Explanation
जैन ग्रंथों में बताया गया है कि पृथ्वीधर ने देवगिरी में जिनालय का निर्माण कराया। उसी स्रोत में यह भी लिखा है कि वे जैन आगमों के संरक्षक थे और देवगिरी में श्वेताम्बर प्रभाव को बढ़ाने में सक्रिय थे। ( jainqq.org)
Spiritual Understanding
जिनालय बनवाना जैन धर्म में बहुत पुण्य का कार्य माना जाता है, क्योंकि इससे तीर्थंकरों की भक्ति, साधना और धर्म-प्रभावना को बल मिलता है। ( jainqq.org)
Takeaway
संक्षेप में, देवगिरी के जिनालय के निर्माता पृथ्वीधर थे। ( jainqq.org)