अगर आपका मतलब 10 वर्ष की उम्र में दीक्षा लेने वाले जैन संत से है, तो वे आचार्य श्री महाप्रज्ञजी थे। उन्होंने 10 वर्ष की उम्र में मुनि-दीक्षा ली थी, और बाद में वे श्वेतांबर तेरापंथ के 10वें आचार्य बने। ( jainworld.jainworld.com)
Explanation
सिर्फ स्पष्टता के लिए: 10 वर्ष की उम्र में उन्हें आचार्य पदवी नहीं मिली थी; उस उम्र में उन्होंने दीक्षा ली थी। आचार्य पदवी उन्हें बाद में मिली। ( jainworld.jainworld.com)