Who said mata pita jab jaanse taav diksha lesu dhari daya
Answer
यह पंक्ति “श्री विजय सेठ-विजया सेठानी की सज्झाय” में आती है। इसलिए यह किसी अलग, स्वतंत्र व्यक्ति का प्रसिद्ध कथन नहीं है; यह उसी Jain sajjhay का हिस्सा है। ( jainqq.org)Explanation
उस प्रसंग में पंक्ति आती है:“माता पिता जब जाणे, तब दीक्षा लेसू धरि दया …” ( jainqq.org)
इसका भाव है कि माता-पिता के जान लेने के बाद दीक्षा लेने का संकल्प किया गया। ( jainqq.org)