श्री विजय सेठ-विजया सेठानी की सज्झाय” Full sajaay
Answer
यह सज्झाय बहुत लंबी है। उपलब्ध जैन संकलन में यह “३३ श्री विजय सेठ विजया सेठानी की सज्झाय” के नाम से दर्ज है। इसमें विजय सेठ और विजया सेठानी के शील-व्रत, संयम, श्रावक-धर्म, 84,000 साधुओं के पारणे, और अंत में चारित्र-ग्रहण तथा केवलज्ञान का वर्णन आता है। ( jainqq.org)Explanation
इसका मूल भाव यह है कि:- विजय सेठ और विजया सेठानी ने बाल्यकाल से ही शील-पालन का दृढ़ संकल्प लिया। ( jainqq.org)
- विवाह के बाद भी उन्होंने अपने व्रत और नियमों की रक्षा की। ( jainqq.org)
- केवली के वचन से उनकी महिमा प्रकट हुई और जिनदास श्रावक की भक्ति से 84,000 साधुओं का पारणा हुआ। ( jainqq.org)
- बाद में माता-पिता को वास्तविक संबंध ज्ञात हुआ, और दोनों ने चारित्र ग्रहण किया। ( jainqq.org)
शुरुआत की एक पंक्ति इस प्रकार है: “प्रह उठी रे पंच परमेष्ठि सदा नमु” ( jainqq.org)