Moksh saptmi katha
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मोक्ष सप्तमी की कथा का मुख्य विषय भगवान पार्श्वनाथ जी का मोक्ष-कल्याणक है। जैन परंपरा में इसे मुकुट सप्तमी, मोक्ष सप्तमी या मुक्ति सप्तमी भी कहा जाता है। यह श्रावण मास की शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है। ( encyclopediaofjainism.com)कथा
कथा के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ, जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर, बनारस के राजा अश्वसेन और रानी वामादेवी के पुत्र थे। युवावस्था में ही उनका मन वैराग्य की ओर था। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने संसार का त्याग किया, कठोर तप किया, 84 दिनों की साधना के बाद केवलज्ञान प्राप्त किया, और अंत में सम्मेद शिखरजी से मोक्ष प्राप्त किया। जैन परंपरा में उनके मोक्ष-स्थान को अत्यंत पवित्र माना जाता है। ( timesofindia.indiatimes.com)इस दिन की कथा में क्षमा का संदेश विशेष रूप से आता है। जैन परंपरा में भगवान पार्श्वनाथ और कमठ के बीच दीर्घकालीन वैर की कथा स्मरण की जाती है, और पार्श्वनाथ भगवान की क्षमाशीलता को इस पर्व का मूल भाव माना जाता है। इसी कारण इस दिन उपवास, पूजा, दान और भक्ति के कार्य किए जाते हैं। ( encyclopediaofjainism.com)