शत्रुंजय तीर्थ का बारहवाँ उद्धार पांडवों ने कराया था, और इसे श्री नेमिनाथ भगवान के काल का माना जाता है। ( jainsite.com)
Explanation
शत्रुंजय तीर्थ की पारंपरिक उद्धार-परंपरा में 12वें उद्धार के सामने “Pandavas” लिखा मिलता है। शत्रुंजय पर लिखे अध्ययन भी बताते हैं कि इसके उद्धारों की परंपरा प्राचीन और पौराणिक-ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी मानी जाती है। ( jainsite.com)
Spiritual Understanding
यह परंपरा शत्रुंजय तीर्थ की महिमा, उसकी प्राचीनता, और जैन साधना-परंपरा में उसके विशेष स्थान को दर्शाती है। ( jainsite.com)
Takeaway
संक्षेप में: बारवाँ उद्धार पांडवों ने कराया था। ( jainsite.com)