pahad per sangpati ko maal kab pehnayi jati hai?
Answer
अगर आपका मतलब संघपति से है, तो माला आमतौर पर संघ के स्वागत, सम्मान, या तीर्थ-यात्रा के शुभ अवसर पर पहनाई जाती है। यह पक्का नियम नहीं, बल्कि स्थान और परंपरा के अनुसार होता है।Explanation
जैन परंपरा में संघपति को माला पहनाना:- सम्मान का प्रतीक होता है
- संघ-यात्रा के शुभ आरंभ या आगमन पर किया जा सकता है
- कई बार मंदिर/तीर्थ पर संघ के पहुंचने के बाद भी किया जाता है
Takeaway
संक्षेप में, माला पहनाने का समय निश्चित नहीं होता; यह अवसर और स्थानीय परंपरा पर निर्भर करता है।अगर आप चाहें, मैं संघपति, संघयात्रा और माला-प्रथा का जैन दृष्टि से सरल अर्थ भी बता सकता हूँ।