sangpati ko vidhividhan chaumukji ke samne maala kab pehnayi jati hai?
Answer
सामान्यतः संगपती को माला चौमुखजी के दर्शन के बाद और मुख्य विधि शुरू होने से पहले पहनाई जाती है। लेकिन स्थान, परंपरा और जिस विधि-विधान का पालन हो रहा है, उसके अनुसार क्रम थोड़ा बदल सकता है।Explanation
जैन विधि-विधान में माला पहनाना सम्मान और शुभारंभ का संकेत माना जाता है। इसलिए आम तौर पर पहले:- चौमुखजी के दर्शन होते हैं
- मंगलाचरण या आवश्यक विधि होती है
- फिर संगपती को सम्मानपूर्वक माला पहनाई जाती है
- उसके बाद आगे की पूजा/विधि शुरू होती है
Spiritual Understanding
माला पहनाने का अर्थ केवल सम्मान नहीं, बल्कि:- विनम्रता
- शुभ भावना
- धर्मकार्य के प्रति आदर
- और संघ की एकता
भी होता है। जैन परंपरा में हर कार्य शुद्ध भाव और मर्यादा के साथ किया जाता है।