कांटे निकलते निकलते कर्मों का कांटा किसने निकाला
Answer
जैन दृष्टि से कर्मों का कांटा किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र, तप और आत्मसाधना ने निकाला। यदि भावार्थ में पूछा जाए, तो तीर्थंकर भगवान ने मोक्षमार्ग दिखाया और उसी मार्ग से कर्मों का कांटा निकलता है।Explanation
“कांटे निकलते-निकलते” का अर्थ है जैसे शरीर से कांटा निकाला जाता है, वैसे ही आत्मा पर लगे कर्म धीरे-धीरे उतारने पड़ते हैं। जैन धर्म में कर्मों से मुक्ति के लिए:- सम्यक श्रद्धा
- सम्यक ज्ञान
- सम्यक आचरण
- तपस्या
- संयम
- वैराग्य
बहुत आवश्यक माने जाते हैं।